ट्रम्प और किम ने 12 सेकंड हाथ मिलाया, 65 साल के विवाद में पहली बार अमेरिकी राष्ट्रपति और उत्तर कोरियाई तानाशाह मिले

ट्रम्प और किम ने 12 सेकंड हाथ मिलाया, 65 साल के विवाद में पहली बार अमेरिकी राष्ट्रपति और उत्तर कोरियाई तानाशाह मिले
कवरेज के लिए दुनियाभर के 3000 मीडियाकर्मी सिंगापुर पहुंचे हैं
चर्चा है कि सब ठीक रहा तो ट्रम्प जुलाई में प्योंग्यांग जाएंगे
सिंगापुर. डोनाल्ड ट्रम्प और उत्तर कोरियाई तानाशाह किम जोंग-उन के बीच मंगलवार को पहली बार यहां के कापेला होटल में मुलाकात हुई। दोनों नेताओं ने गर्मजोशी से करीब 12 सेकंड तक हाथ मिलाया। इसके लिए 6 महीने से कोशिशें हो रही थीं। बीच में कई बार ऐसा लगा कि दोनों नेता शायद ही आमने-सामने आएं। ट्रम्प ने एक बार मुलाकात रद्द भी कर दी थी, लेकिन किम ने उम्मीद नहीं छोड़ी। अमेरिकी राष्ट्रपति ड्वाइट आइजनहॉवर (1953) से लेकर (2016) तक 11 अमेरिकी राष्ट्रपतियों ने उत्तर कोरिया का मसला सुलझाने की कोशिश की, लेकिन बात नहीं बनी। वहीं, ट्रम्प का कहना है कि वे पहले मिनट में किम के हाव-भाव देखकर बता देंगे कि समिट कारगर होगी या नहीं।
अपडेट्स:
6:39AM: दोनों नेताओं के बीच समिट शुरू हुआ।
6:39AM:किम ने कहा- आपसे मिलना इतना आसान नहीं था। मुझे खुशी है कि हम सारी बाधाओं को पार कर मिल रहे हैं।
6:38AM: मीडिया सेट्रम्प ने कहा- मुझे विश्वास है कि हम दोनों देशों के संबंध अच्छे होंगे।
6:36 AM: दोनों नेताओं ने बेहद गर्मजोशी ने हाथ मिलाया।करीब 12 सेकंड दोनों हाथ मिलाते रहे।
6:27 AM:ट्रम्प और किम होटल कापेला पहुंचे।
सिंगापुर को इसलिए चुना क्योंकि इसके दोनों देशों से बेहतर रिश्ते
- दक्षिण कोरिया और उत्तर कोरिया के बीच पन्मुंजोम गांव में डिमिलिट्राइज्ड जोन (असैन्य क्षेत्र) हैं। पहले यहीं दोनों नेताओं के बीच मिलने की खबर थी, लेकिन अमेरिकी अफसर सुरक्षा कारणों से राजी नहीं हुए। तब ऐसी जगह पर विचार किया गया जो दोनों देशों के लिए भरोसेमंद रहे। तब सिंगापुर का नाम आया। इसकी वजह यह कि इस देश के अमेरिका और उत्तर कोरिया से बेहतर रिश्ते हैं।
- सिंगापुर में उत्तर कोरिया का दूतावास भी है। इसके अलावा दोनों देशों के बीच अच्छे कारोबारी संबंध भी हैं। यहां विरोध-प्रदर्शन की भी मनाही है।
बातचीत पर दुनिया की नजरें क्यों हैं?
- ट्रम्प के सत्ता में आए तो तब अमेरिका और उत्तर कोरिया के रिश्ते काफी बिगड़े हुए थे। उत्तर कोरिया लगातार परमाणु परीक्षण कर रहा था। जंग तक की नौबत आ गई थी।
- जनवरी 2018 में नई शुरुआत हुई। उत्तर कोरिया ने शांति की पहल की। मार्च में दक्षिण कोरिया ने अपने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और एक अन्य अफसर को उत्तर कोरिया भेजा। बाद में दोनों अफसर उत्तर कोरिया की ट्रम्प से बातचीत की पेशकश लेकर अमेरिका गए। ट्रम्प राजी भी हो गए। लेकिन, बीच में तल्खी आ गई। तब दुनिया को लगा कि अब बात नहीं बनने वाली। लेकिन 1 जून को व्हाइट हाउस ने फिर से दोनों नेताओं के बीच होने वाली बैठक की पुष्टि कर दी।
- माना जा रहा है कि किम ने परमाणु कार्यक्रम बंद करने का फैसला सोच समझकर लिया है। ताकि उत्तर कोरिया से प्रतिबंध हट सकें और वहां की इकोनॉमी बेहतर हो सके।
बातचीत नाकाम होने से दुनिया को खतरा
- उत्तर कोरिया में रूस-चीन का तो दक्षिण कोरिया के साथ जापान और अमेरिका हैं।
- बातचीत कामयाब नहीं हुई तो दो धड़ों में बंटे इन देशों के बीच खाई और गहरी हो सकती है।
- जापान, दक्षिण कोरिया और अमेरिका का गुआम बेस उत्तर कोरिया की मिसाइलों की जद में आता है। साथ ही उसके पास परमाणु ताकत भी है। इन दोनों देशों पर कोई भी हमला अमेरिका को जवाबी कार्रवाई करने के लिए भड़का सकता है। जिससे दोनों ही तरफ जान-माल का भारी नुकसान हो सकता है। उत्तर कोरिया की तरफ से इस खतरे को कम करने के लिए भी ये बातचीत बेहद अहम है।
पांच लोग हैं ट्रम्प-किम वार्ता के अहम चेहरे
1. किम जोंग-उन: उत्तर कोरिया के राष्ट्रपति। 2018 की शुरूआत तक अमेरिका को धमकी दे रहे थे। हालांकि, अमेरिका और यूएन की ओर से प्रतिबंधों का शिकंजा कसने की वजह से बातचीत को मजबूर हुए।
2. डोनाल्ड ट्रम्प: बिल क्लिंटन के बाद दूसरे राष्ट्रपति जो उत्तर कोरियाई के किसी तानाशाह से बातचीत के इतने करीब आ पाए।
3. मून जे-इन: दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति। वे मुलाकात के दौरान सिंगापुर में नहीं होंगे। दक्षिण कोरिया का कोई भी नेता उत्तर कोरिया के तानाशाह को अपने साथ शामिल नहीं कर पाया था। लेकिन मून को इसमें कामयाबी मिली है।
4. माइक पोम्पियो: अमेरिकी रक्षामंत्री और ट्रम्प के करीबी। अपनी नियुक्ति के बाद से ही किम और ट्रम्प की मुलाकात में अहम भूमिका निभा रहे हैं। तीन बार प्योंग्यांग का दौरा कर चुके। माना जा रहा है कि ट्रम्प ने टिलरसन की जगह उन्हें इसी लिए नियुक्त किया था ताकि उत्तर कोरिया के साथ रिश्तों को बढ़ाया जा सके।
5. किम योंग-चोल: किम के करीबी। उत्तर कोरियाई परमाणु मिशन से जुड़े। किम योंग-चोल अमेरिका को दोबारा बातचीत के लिए मनाने के लिए व्हाइट हाउस में ट्रम्प से मिले थे।
11 अमेरिकी राष्ट्रपति नाकाम, लेकिन ट्रम्प को उम्मीद
- 1953 में कोरियाई युद्ध खत्म हुआ था।
- 1954 में जेनेवा कॉन्फ्रेंस में रूस (तब सोवियत संघ), चीन, अमेरिका, यूके और फ्रांस कोरिया की समस्या का हल निकालने के लिए इकट्ठा हुए। उस वक्त अमेरिकी राष्ट्रपति आइजनहॉवर थे। मीटिंग में अमेरिकी विदेश मंत्री रहे जॉन फॉस्टर डलेस का अड़ियल रुख रहा। उन्होंने चीन के साथ सीधे बात करने से मना कर दिया। जिसके चलते कोई नतीजा नहीं निकल पाया।
- 1960 के दशक यानी जॉन एफ केनेडी और लिंडन जॉनसन प्रशासन के वक्त उत्तर कोरिया-अमेरिका के रिश्ते तनावपूर्ण हो गए। 1968 में उत्तर कोरिया ने अमेरिकी जंगी जहाज यूएसएस प्यूबलो को पकड़ लिया। 1969 में उत्तर कोरिया ने अमेरिकी मिग-21 मार गिराया, जिसमें 31 अमेरिकी मारे गए।
- 1970 के दशक में उत्तर कोरिया ने अपनी नीति बदली। उसने कहा कि कोरियाई प्रायद्वीप में शांति-सुरक्षा लाने के लिए संधि जरूरी होगी। 1974 में उत्तर कोरिया ने यूएस को शांति वार्ता के लिए न्योता भेजा। लेकिन न तो रिचर्ड निक्सन और न ही गेराल्ड फोर्ड ने इसका कोई जवाब दिया।
- उत्तर कोरिया के तब तानाशाह रहे किम द्वितीय सुंग ने तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जिमी कार्टर के सामने शांति समझौते का विचार रखा लेकिन इसका भी कोई फायदा नहीं हुआ। रोनाल्ड रीगन, जॉर्ज एचडब्ल्यू बुश, बिल क्लिंटन, जॉर्ज डब्ल्यू बुश और बराक ओबामा भी उत्तर कोरिया के साथ कोई हल निकालने में नाकाम रहे।
कभी हां-कभी ना के बीच रही ट्रम्प और किम की मुलाकात
10 मई: अमेरिकी राष्ट्रपति ने सबसे पहले ट्वीट कर तानाशाह से सिंगापुर में मिलने की बात कही थी। इसी संदेश में उन्होंने मीटिंग की तारीख का भी जिक्र किया था।
16 मई: उत्तर कोरिया ने अमेरिका को समिट से पीछे हटने की धमकी दी। सरकारी मीडिया में चले कुछ अधिकारियों के बयान में ये भी कहा गया था कि अमेरिका एकतरफा तौर पर उत्तर कोरिया पर कार्रवाई कर रहा है और इसलिए तानाशाह का हाल लीबिया के गद्दाफी जैसा हो सकता है।
24 मई: ट्रम्प ने पत्र जारी कर समिट को रद्द कर दिया। उन्होंने इसके पीछे उत्तर कोरिया के भड़काऊ रवैये को वजह बताया था।
26 मई: मुलाकात रद्द होने के बाद किम जोंग-उन दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जे-इन से मिलने पहुंचा। दोनों ने पन्मुंजोम समझौते पर बातचीत की।
31 मई: किम जोंग और ट्रम्प के बीच बातचीत की कोशिशों को आगे बढ़ाने के लिए उत्तर कोरिया का एक अफसर जनरल किम योंग-चोल 18 साल बाद अमेरिका पहुंचा। विदेश मंत्री माइक पोम्पियो से हुई मुलाकात।
1 जून: जनरल किम योंग-चोल व्हाईट हाउस में ट्रम्प से मिले। बातचीत के बाद ट्रम्प ने एक बार फिर दोनों देशों बीच 12 जून को सिंगापुर में मुलाकात का एलान किया।

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