हम विश्व कप में खेलने की सोचने से पहले एशिया में टॉप 10 में आने की सोचे'

हम विश्व कप में खेलने की सोचने से पहले एशिया में टॉप 10 में आने की सोचे'
भारत के लिए सर्वकालीन बेहतरीन फुटबॉल स्ट्राइकरों में से एक और उसके लिए सबसे ज्यादा गोल करने करने वाले 34 साल के कप्तान सुनील छेत्री भारत को केन्या के खिलाफ मुंबई में चार देशों का इंटरकॉन्टिनेंटल कप के फाइनल में 2-0 से जीत के साथ चैंपियन बना कर सुर्खियों में हैं। सुनील छेत्री अब अपने 'बड़े भाई' भाईचुंग भूटिया के साथ रूस में शुरू हो रहे फीफा वर्ल्ड कप में दुनिया भर की फुटबॉल टीमों और फुटबॉलरों की टीवी पर समीक्षा करते देखेंगे। सुनील छेत्री से 'अमर उजाला' फुटबॉल वर्ल्ड कप और भारतीय फुटबॉल के भविष्य पर सोमवार को खास बात की।

सुनील छेत्री ने कहा,  '2018 में फीफा वल्र्ड कप में खिताब कौन जीतेगा इसकी तो मैं भविष्यवाणी नहीं करूंगा क्योंकि दुनिया के श्रेष्ठ फुटबॉलरों के इस संग्राम में कोई भी खुद को सर्वश्रेष्ठ साबित करने में कसर नहीं छोड़ेगा। मैं यह जरूर बता सकता वर्ल्ड कप फुटबा़ल कि मेरी पसंदीदा टीम स्पेन है। मैं यह नहीं कह रहा कि स्पेन की टीम खिताब की दावेदार है या खिताब जीतेगी। इसके बावजूद स्पेन के फुटबॉल खेलने के  अंदाज का मैं उसका मुरीद हूं। मैं वल्र्ड कप के शुरू होने का बेहद उत्सुक हूं। मैं हर मैच देखना चाहता हूं और सर्वश्रेष्ठ फुटबॉल का लुत्फ उठाना चाहता हूं।'

उन्होंने कहा, 'मैं भले ही अब 30 के पार पहुंच चुका हूं लेकिन अभी मुझमें बहुत फुटबॉल बाकी है। मैंने अपने बूढ़े होने की बात तो बस यूं ही हल्के फुल्के अंदाज में कह दी थी। अभी मैं कहीं नहीं जा रहा मैं अभी भारत और अपने क्लब के लिए बहुत खेलूंगा। भारतीय फुटबॉल के लिए एक अच्छी बात यह है कि हर पीढ़ी में सीनियर उदीयमान फुटबॉलरों की दूसरी पीढ़ी का मार्गदर्शन करता है। मेरा मार्गदर्शन भाईचुंग भूटिया ने किया। बड़े भाई की तरह भाईचुंग ने मुझे अंतर्राष्ट्रीय फुटबॉल की बारीकियां सिखाईं। अब हमारे पास भारतीय फुटबॉल की नई पीढ़ी में जेजे ललपेखलुआ, गोलरक्षक गुरप्रीत सिंह संधू और संदेश झींगन के रूप में बेहतरीन यंग खिलाड़ी हैं। सबसे अच्छी बात यह है कि हमारी टीम हर खिलाड़ी एक दूसरे से बेहतरीन तालमेल  और कदमताल कर भारत के अपना सर्वश्रेष्ठ खेल दिखाने में कसर नहीं छोड़ रहा है।'

सुनील छेत्री
छेत्री कहते हैं, 'मैं आज जहां भी पहुंचा हूं उसका पूरा श्रेय मेरे -माता को है। मेरी मां नेपाल में अपनी बहनों के साथ फुटबॉल खिलाड़ी खेली है। मैं इसलिए खुल कर फुटबॉल खेल पाया। आज मुझसे यह सवाल बराबर किया जाता है कि हम वल्र्ड कप फुटबॉल में कब खेलेंगे? भारत के ओलंपिक में कम मेडल जीतने का रोना भी रोया जाता है। मैं हकीकत में जीना पसंद करता हूं। हमें भारत के फुटबॉल वल्र्ड कप में खेलने के ख्वाब को हकीकत में बदलने के लिए पहले एशिया में टॉप 10 में आने की बाबत सोचना चाहिए। हमला अगला लक्ष्य भी यही होना चाहिए। बेशक जापान और दक्षिण कोरिया एशिया की दो शीर्ष टीमें हैं। धीमे-धीमे कदम बढ़ाकर फिर एशिया की टॉप पांच टीमों। जब हमारी भारतीय टीम एशिया में अपना एक अलग मुकाम पा लेगी तभी वह यूरोप की धुरंधर टीमों के खिलाफ खेलने के लिए खुद को तैयार कर पाएगी।'
छेत्री ने आगे बातचीत में कहा,  'हमारे देश में प्रतिभा है लेकिन जरूरत उसे निखारने के लिए फुटबॉल के एक बेहतर ढांचे, कोचिंग और मार्गदर्शन की जरूरत है। जहां तक अगले साल होने वाले एएफसी एशियन कप की बात है तो इसमें बढिय़ा प्रदर्शन के लिए इससे पहले हमें घर से बाहर अपने से उंची रैंकिंग वाली टीमों के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय मैच खेलने की जरूरत है। हमारी टीम का अपने घर में तो रिकॉर्ड बेहतर है लेकिन घर से बाहर हमारी टीम को ज्यादातर संघर्ष करना पड़ता रहा है। मुझे उम्मीद है कि आने वाले महीनों में हमें अपने घर से अपने से बेहतर प्रतिद्वंद्वी टीमों के खिलाफ खेलने का मौका मिलेगा औैर इसमें हम यह आंक सकेंगे कि हकीकत में हम कहां खड़े हैं। टीम में पहली एकादश से बाहर जब भी रिजर्व में रहने वाले खिलाडिय़ों को मौका दिया जाता है तो वे कसौटी पर होते हैं। ऐसे में उन्हें कुछ तो छूट देनी होगी और बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित करना होगा। मौका पाकर ही रिजर्व बेहतर खेलेंगे। रही बात ओलंपिक में ज्यादा मेडल जीतने की तो यह तभी होगा जब हम भारत में खेल की संस्कृति विकसित कर पाएंगे।'

उन्होंने आगे कहा, 'जहां तक आईएसएल और आई लीग की बात है तो मैं देश में एक ही एकीकृत लीग का समर्थक हूं। हालांकि इस बाबत कोई भी फैसला लेने का हक केवल एआईएफएफ को ही है। देश में एक ही एकीकृत लीग के बाद बाकी टीमों को विभिन्न अन्य ए और बी डिविजन में बांट दिया जाए तो भारतीय फुटबॉल बेहतर होगी।’

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